का सरल उत्तर
संत हंस के समान गुणरूपी दूध ग्रहण करते हैं, दूसरों के दोष ढकते हैं, कपास समान निरस और उज्ज्वल हैं। असंत (खल) किसी का भी हित सुनकर जलते हैं, दूसरों के दोष हज़ार आँखों से देखते हैं। दोनों एक ही संसार में उत्पन्न होते हैं पर गुण कमल-जोंक समान भिन्न हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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