भागवत रस बार-बार क्यों पीना चाहिए?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
शुकदेवजी कहते हैं कि भागवत रस अमृतमय, छिलका-गुठली रहित और दुर्लभ है; चेतना रहते इसे बार-बार पीना चाहिए।
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श्रीमद्भागवत
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