का सरल उत्तर
श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान का नाम जान-बूझकर या अनजाने में — किसी भी भाव से लिया जाए — पाप नष्ट होते हैं, क्योंकि नाम और नामी (भगवान) अलग नहीं हैं। नाम-उच्चारण से भाव-शुद्धि होती है जिससे पाप-प्रवृत्ति का क्षय होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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