ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
सरल उत्तर

भगवान ने नारदजी के शाप को कैसे स्वीकार किया?

का सरल उत्तर

सरल उत्तर

भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक सिर पर चढ़ाया — यह उनकी लीला-योजना का अंश था। नारदजी के पश्चाताप पर कहा — सब मेरी इच्छा से हुआ, चिन्ता मत करो। शंकर शतनाम जपो, शान्ति मिलेगी। 'कोउ नहीं सिव समान प्रिय मोरें' — शिवजी के समान मुझे कोई प्रिय नहीं।

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

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