भीष्म पितामह की मृत्यु क्यों नहीं हुई बाणों पर?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
भीष्म पितामह को उनके पिता शांतनु से इच्छामृत्यु का वरदान था इसलिए बाणों की शैया पर 58 दिन पड़े रहने पर भी वे जीवित रहे। वे उत्तरायण की प्रतीक्षा में थे क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण में मृत्यु को मोक्षदायी माना जाता है। मकर संक्रांति पर उन्होंने स्वेच्छा से प्राण त्यागे।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
महाभारत
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।