का सरल उत्तर
भोजन ग्रहण करने से पूर्व अन्न के दोषों को नष्ट करने और उसे प्रसाद बनाने के लिए गीता के श्लोक 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ...' का उच्चारण करना चाहिए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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