का सरल उत्तर
विष्णु पुराण के अनुसार भुजाएं उठाकर श्राद्ध इस प्रकार करना चाहिए। एकांत वन में जाकर, दोनों भुजाएं आकाश की ओर उठाकर, दिक्पालों और सूर्य देव की ओर देखते हुए, ऊंचे स्वर में पुकारें, हे पितृगण, मेरे पास श्राद्ध कर्म के योग्य न कोई धन है, न सामग्री। मैं केवल आपको नमस्कार करता हूँ, आप मेरी इस भक्ति और अश्रुपूर्ण श्रद्धा से ही तृप्ति लाभ करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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