का सरल उत्तर
तात्पर्य — संतों की महिमा इतनी अपार है कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितों की वाणी भी उसे कहने में सकुचाती है। तुलसीदासजी ने कहा — जैसे सब्ज़ी बेचने वाला मणियों के गुण नहीं बता सकता, वैसे ही मुझसे यह महिमा कही नहीं जाती।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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