का सरल उत्तर
ध्यान से कर्म-शुद्धि: गीता (4.37): ज्ञानाग्नि सभी कर्म भस्म करती है। चार स्तर: क्रियमाण (सात्विक बनना), आगामी (अबंधनकारी), संचित (संस्कार नष्ट), प्रारब्ध (शीघ्र क्षय)। योगसूत्र: समाधि-भावना → क्लेश-तनुकरण → कर्म-क्षय।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।