का सरल उत्तर
ध्यान में शरीर-अनुभव: प्रारंभ — भारीपन, श्वास मंद। मध्य — हल्कापन, झनझनाहट, आनंद। गहन — शरीर-बोध समाप्त, आंतरिक प्रकाश, नाद (शंख/घंटी), स्फुरण। तैत्तिरीयोपनिषद: आनंदमय कोश जागृति = 'आनंदो ब्रह्म।' अनुभवों पर आसक्ति न करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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