विस्तृत उत्तर
ध्यान के दौरान होने वाले शारीरिक और आंतरिक अनुभवों का वर्णन योग शास्त्रों में विस्तार से मिलता है।
हठयोग प्रदीपिका (4.67-79) के अनुसार ध्यान के चरण
1प्रारंभिक चरण (1-10 मिनट)
- ▸शरीर भारी और स्थिर लगता है
- ▸श्वास मंद होती है
- ▸आँखों में हल्की जलन या भारीपन
2मध्य चरण (10-30 मिनट)
- ▸शरीर हल्का लगने लगता है
- ▸हाथों, पैरों में हल्की झनझनाहट
- ▸भीतर से आनंद का अनुभव
- ▸कभी-कभी कंपन (यह नाड़ी-शुद्धि का लक्षण)
3गहन चरण
- ▸शरीर का बोध समाप्त
- ▸आंतरिक प्रकाश का अनुभव
- ▸ध्वनियाँ सुनाई देना (नाद) — शंख, घंटी, मेघ आदि
- ▸'स्फुरण' (आत्मिक कंपन)
तैत्तिरीयोपनिषद: आनंदमय कोश के जागृत होने पर परमानंद का अनुभव — 'आनंदो ब्रह्म।'
महत्त्वपूर्ण: अनुभवों पर ध्यान न दें — ये साधन हैं, साध्य नहीं। इन पर आसक्ति ध्यान की गहराई को रोकती है।




