का सरल उत्तर
दिव्य-भाव वह अवस्था है जब साधक समस्त संघर्षों से पार होकर सहज ही दिव्यता, प्रेम और करुणा में स्थित हो जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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