का सरल उत्तर
अद्वैत (शंकर): जीव = ब्रह्म, जगत मिथ्या, ज्ञान से मोक्ष। द्वैत (मध्व): जीव ≠ ब्रह्म (सदा भिन्न), जगत सत्य, भक्ति+कृपा से मोक्ष। पंच भेद नित्य। 'तत्त्वमसि' — अद्वैत: 'तू वही है', द्वैत: 'तू उसका है।'
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।