का सरल उत्तर
द्वितीया चन्द्रमा की दूसरी कला है। वैदिक काल-गणना के अनुसार एक चान्द्र-मास में पन्द्रह तिथियाँ होती हैं, जिनमें द्वितीया चन्द्रमा की द्वितीय कला का प्रतिनिधित्व करती है। शुक्ल पक्ष में यह बढ़ते क्रम में दूसरी कला होती है, और कृष्ण पक्ष में घटते क्रम में। यह तिथि यमराज से सम्बन्धित मानी गई है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।