का सरल उत्तर
द्वितीया श्राद्ध और शिव-सायुज्य का सम्बन्ध प्रत्यक्ष है। सायुज्य का अर्थ है भगवान के साथ एक होना। स्कन्द पुराण के अनुसार द्वितीया श्राद्ध भक्ति से करने पर श्राद्धकर्ता मृत्यु के बाद कैलास प्राप्त करता है और शिव के गणों के साथ मोद पाता है। यह शिव-सायुज्य के निकट की अवस्था है। पितृ-भक्ति शिव-प्राप्ति का मार्ग है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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