का सरल उत्तर
द्वितीया तिथि को स्वाभाविक रूप से मरे व्यक्ति का श्राद्ध भी द्वितीया तिथि को ही होता है। शुक्ल या कृष्ण दोनों पक्षों में मृत्यु पर समान नियम है। मृत्यु दिन में हुई हो या रात में, मृत्यु के समय जो तिथि थी, वही श्राद्ध तिथि मानी जाती है। परंतु अकाल मृत्यु पर चतुर्दशी, सधवा पर नवमी, और संन्यासी पर द्वादशी को श्राद्ध होगा।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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