का सरल उत्तर
एकादशी व्रत द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद, हरिवासर काल समाप्त होने पर तोड़ना चाहिए। त्रयोदशी आने से पहले पारण अवश्य कर लें। पहले विष्णु पूजा करें, चरणामृत लें, फिर भोजन ग्रहण करें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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