का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण के दसवें अध्याय में बताया गया है कि मृत्यु के तुरंत बाद मुंडन, शव-स्नान, छह स्थानों पर पिंडदान, दाह संस्कार (सूर्यास्त पूर्व), गंगा में अस्थि-विसर्जन और दशगात्र-कर्म प्रारंभ करने का विधान है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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