का सरल उत्तर
गायत्री = 24 अक्षर → पुरश्चरण = 24 लाख जप। त्रिसंध्या उपासना सर्वोत्तम। साधना: सूर्यमुखी, लाल-पीले वस्त्र, स्फटिक माला, ब्रह्मचर्य। हवन (10वाँ भाग), तर्पण, मार्जन। ध्यान: हंसवाहिनी गायत्री देवी। सिद्धि: प्रकाश-अनुभव और बुद्धि-स्पष्टता।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।