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गीता में तीन गुणों सत्व रज तम का वर्णन

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गीता 14: सत्व = ज्ञान, प्रकाश, सुख (ऊर्ध्वगति); रजस् = आसक्ति, कामना, अशांति (मध्य गति); तमस् = अज्ञान, आलस्य, प्रमाद (अधोगति)। तीनों बांधते हैं। गुणातीत = तीनों से परे, समभावी। उपाय: सात्विक आहार, सत्संग, ध्यान से सत्व बढ़ाएं।

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