का सरल उत्तर
प्रत्यक्ष श्लोक-प्रमाण नहीं है। पर घंटाकर्ण स्वयं पिशाच से शिवगण बने — इसलिए आगमिक मान्यता है कि इनकी आराधना से पिशाच-वृत्ति (मानसिक विकार) दूर होती है। नाद-योग और ध्वनि-चिकित्सा का वैज्ञानिक आधार भी इसे समर्थन देता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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