का सरल उत्तर
अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग — 20 श्लोक): संसार = उल्टा अश्वत्थ वृक्ष। जीवात्मा ईश्वर का अंश (15.7)। तीन पुरुष: क्षर (नाशवान), अक्षर (अविनाशी), पुरुषोत्तम (सर्वोच्च परमात्मा)। 'इसे जानने वाला सर्वज्ञ' (15.19-20)। गीता का सबसे गोपनीय अध्याय।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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