का सरल उत्तर
गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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