का सरल उत्तर
स्वर्ग-नरक में कर्मों का फल सूक्ष्म शरीर से भोगा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार पिंडदान से निर्मित यह प्रेत शरीर यमलोक की यात्रा करता है और कर्मानुसार सुख-दुःख भोगता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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