केरल तंत्र में घंटाकर्ण का क्या स्वरूप है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
केरल दारुकजित विद्या में घंटाकर्ण शिव के कर्ण-मल से उत्पन्न — भद्रकाली के रक्षक 'पुलि-भैरव'। प्रेत-बाधा और नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा उनकी भूमिका। तीनों परंपराओं में वे उग्र रक्षक देवता हैं।
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
श्रेणी
तंत्र एवं साधना
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।