केवल मनुष्य को ही कर्मफल क्यों भोगना पड़ता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
मनुष्य 'कर्म योनि' में है — उसे विवेक और स्वतंत्र इच्छा से नए कर्म करने की शक्ति मिली है। इसीलिए वह अपने कर्मों का पूरा उत्तरदायी है और उसे उनका फल भोगना पड़ता है।
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