का सरल उत्तर
ब्रह्म मुहूर्त में सत्त्व गुण और प्राण शक्ति चरम पर होती है। इस समय पीनियल ग्रंथि (तीसरा नेत्र) सक्रिय होती है, जिससे कुक्कुटेश्वर लिंग पर की गई साधना सीधे आत्मबोध और परमानंद की ओर ले जाती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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