का सरल उत्तर
नहीं, सभी पाप समान नहीं। गरुड़ पुराण में महापाप (ब्रह्महत्या, गोहत्या, सुरापान आदि), सामान्य पाप (झूठ, चोरी) और मानसिक पाप (बुरे विचार) — तीन स्तर हैं। प्रत्येक के लिए अलग दंड है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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