लक्ष्मणजी के क्रोधित वचन सुनकर विश्वामित्रजी ने क्या किया?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
विश्वामित्रजी, रामजी और मुनि मन में प्रसन्न हुए, पुलकित हुए। रामजी ने इशारे से लक्ष्मण को शान्त कर पास बैठाया। फिर विश्वामित्रजी ने कहा — 'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, धनुष तोड़ो!
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श्रेणी
रामचरितमानस — बालकाण्ड
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