मंदिर में पूजा के दौरान ध्यान क्यों जरूरी है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
गीता (17.11): मन एकाग्र करके की गई पूजा सात्विक। गीता (3.6): शरीर पूजा करे और मन भटके — वह मिथ्याचार। बिना ध्यान के पूजा = शरीर का व्यायाम, आत्मा का पोषण नहीं। ध्यान पूजा को यांत्रिक क्रिया से जीवंत साधना में बदलता है।
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मंदिर पूजा
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