का सरल उत्तर
पतंजलि: 'जप = अर्थ भावना सहित' → जप = ध्यान का साधन। क्रम: वाचिक → उपांशु → मानसिक → अजपा → ध्यान → समाधि। जप = मन की लगाम → मन शांत → स्वतः ध्यान। जप = प्रवेश द्वार, ध्यान = फल।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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