का सरल उत्तर
सिद्धि-चिह्न (मंत्रमहार्णव): असाधारण गंध, स्पर्श-अनुभव, प्रकाश, स्वप्न में देवदर्शन, मंत्र का स्वतः स्फुरण। क्रम: प्रारंभ में शांति-प्रसन्नता, मध्यम में स्वप्न दर्शन और विद्युत-तरंगें, उन्नत में अजपा जप और वाणी-प्रभाव। कुलार्णव: अनुभव किसी को न बताएं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।