का सरल उत्तर
मृत्यु के समय श्वास धीरे-धीरे अनियमित और कमजोर होती जाती है। पाँचों प्राण एक-एक कर शिथिल होते हैं। पुण्यात्मा में उदान वायु ऊपर की ओर उठती है जिससे मृत्यु शांत होती है। पापी में यह प्रक्रिया कष्टकारी होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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