का सरल उत्तर
नारदजी ने पहले शिवजी को (जिन्होंने मना किया था) और फिर भगवान विष्णु को क्षीरसागर में जाकर काम-विजय का पूरा वृत्तान्त सुनाया। यद्यपि शिवजी ने पहले से बरज रखा था कि यह बात किसी से न कहना।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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