विस्तृत उत्तर
नारदजी ने कामदेव को जीतने का वृत्तान्त पहले भगवान शिवजी को और फिर भगवान विष्णु (क्षीरसागर) को सुनाया।
चौपाई — 'एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना। छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा॥'
अर्थ — एक बार गानविद्यामें निपुण मुनिनाथ नारदजी हाथोंमें सुन्दर वीणा लिये, हरिगुण गाते हुए क्षीरसागरको गये, जहाँ वेदोंके मस्तकस्वरूप लक्ष्मीनिवास भगवान् नारायण रहते हैं।
यद्यपि शिवजीने उन्हें पहलेसे ही बरज (मना) रखा था कि कामजयकी बात किसीसे न कहना, फिर भी नारदजीने भगवान विष्णु को कामदेवका सारा चरित्र कह सुनाया।
चौपाई — 'काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे। अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया॥'
अर्थ — यद्यपि शिवजीने उन्हें पहलेसे ही बरज रखा था, तो भी नारदजीने कामदेवका सारा चरित्र भगवानूको कह सुनाया। श्रीरघुनाथजीकी माया बड़ी ही प्रबल है। जगतमें ऐसा कौन जन्मा है जिसे वह मोहित न कर दे।





