का सरल उत्तर
पहले पार्वतीजी ने माता को समझाया — 'जो विधाता रच दे वह नहीं टलता, दोष किसी को मत दो।' फिर नारदजी ने आकर सबको समझाया कि शिवजी स्वयं भगवान हैं। शिवजी ने सुन्दर रूप धारण किया तो सब प्रसन्न हुए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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