का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण में जलाने की निश्चित संख्या नहीं, परंतु यह निरंतर प्रक्रिया है। संजीवन नरक में जलाकर पुनः जीवित करके बार-बार जलाया जाता है। 'प्रलयपर्यंत घोर नरकों में पकते रहते हैं' — यही वर्णन है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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