का सरल उत्तर
पार्वण श्राद्ध की मुख्य विशेषता तीन पीढ़ियों का सतीक आवाहन है। इसमें पिता, पितामह, प्रपितामह और मातामह, प्रमातामह, वृद्धप्रमातामह — सब अपनी पत्नियों के साथ आहूत होते हैं। साथ ही विश्वेदेवों यानी पुरूरवा-आर्द्रव या क्रतु-दक्ष की स्थापना अनिवार्य होती है। तीन पिण्ड बनते हैं, जो तीन पीढ़ियों के प्रतीक हैं। यह मुख्यतः पितृ पक्ष में होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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