का सरल उत्तर
पार्वतीजी ने वन (बिपिन) में जाकर तपस्या की। 'उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना॥' — शिवजी के चरणों को हृदय में धारण करके वन में तप करने लगीं। सुकुमार शरीर होने पर भी सब भोग त्याग दिये।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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