का सरल उत्तर
पार्वतीजी ने कहा — 'जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी' — करोड़ जन्मों तक या तो शिवजी को वरूँगी या कुमारी रहूँगी। स्वयं शिवजी मना करें तब भी नारदजी का उपदेश नहीं छोडूँगी। ऋषि प्रसन्न हुए — 'जय जगदम्बिके भवानी!'
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