का सरल उत्तर
पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं। मृत्यु के बाद उनकी जीवात्मा अपने संचित कर्मों के अनुसार अगली योनि धारण करती है और क्रमशः उच्च योनियों की ओर बढ़ती है जब तक मनुष्य जन्म न मिले।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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