का सरल उत्तर
पिंडदान से — प्रेत का शरीर निर्मित होता है, भूख-प्यास कम होती है, यमलोक यात्रा की शक्ति मिलती है और अंततः प्रेत-योनि से मुक्ति होती है। बिना पिंडदान के प्रेत कल्पान्त तक भटकता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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