का सरल उत्तर
दशगात्र में — प्रत्येक पिंड से एक-एक अंग बनता है (1=सिर, 2=ज्ञानेंद्रियाँ, 3=गर्दन, 4=छाती, 5=पीठ, 6=पेट, 7=कमर, 8=जाँघ, 9=पैर, 10=पूर्ण देह)। दसवें दिन 'हस्तमात्र' यातना-शरीर पूर्ण होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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