का सरल उत्तर
पिंडदान न मिलने पर — प्रेत शरीरहीन और असहाय, भूखा-प्यासा, यमदूतों का कठोर व्यवहार और 'कल्पान्त तक निर्जन वन में दुखी भटकन' — यह गरुड़ पुराण का वचन है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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