का सरल उत्तर
गरुड़ पुराण का श्लोक — 'दग्धे देहे पुनर्देहः पिण्डैरुत्पद्यते' — दस दिनों के दस पिंडों से 'हस्तमात्र' (एक हाथ बराबर) यातना-शरीर बनता है। प्रत्येक पिंड से एक-एक अंग का निर्माण होता है। इसी शरीर से जीव यमयात्रा करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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