का सरल उत्तर
पिण्डदान की शुरुआत स्वयं भगवान विष्णु के वराह अवतार ने की थी। जब उन्होंने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को रसातल से बाहर निकाला, तब उनकी दाढ़ से गिरे मृदा अंश से तीन पिण्डों का निर्माण कर, कुशा पर दक्षिण दिशा में स्थापित किया, और उन्हें पिता, पितामह तथा प्रपितामह के शाश्वत प्रतीक घोषित किया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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