का सरल उत्तर
पिण्डदान श्राद्ध का हृदय है। पके हुए चावल, गाय का दूध, घी, शहद, जौ और काले तिल को मिलाकर गोलाकार तीन पिण्ड बनाए जाते हैं, जो पिता, पितामह और प्रपितामह तीन पीढ़ियों के प्रतीक होते हैं। इन्हें वेदी पर कुशा बिछाकर स्थापित किया जाता है। इसकी शुरुआत भगवान वराह ने की थी।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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