का सरल उत्तर
प्रदोष व्रत त्रयोदशी को रखा जाता है। पूजा का समय — सूर्यास्त से ४५ मिनट पहले से ४५ मिनट बाद (प्रदोष काल) — सबसे शुभ है। स्नान, उपवास, शिवलिंग पूजा, बेलपत्र, जल अभिषेक और कथा श्रवण इसके मुख्य अंग हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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