का सरल उत्तर
प्रेत अवस्था मृत्यु के तुरंत बाद उत्पन्न होती है। सामान्य मृत्यु में 13 दिन तक, अकाल मृत्यु में शेष आयु तक और बिना संस्कार के कल्पान्त तक रहती है। पिंडदान से यह समाप्त होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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