का सरल उत्तर
प्रेत से पितर बनने की प्रक्रिया — दाह-संस्कार → दशगात्र → एकादशाह → षोडश श्राद्ध → मासिक श्राद्ध → सपिंडीकरण (यहाँ प्रेत 'पितर' बनता है) → गया श्राद्ध (परम गति)। सपिंडीकरण इस यात्रा का निर्णायक पड़ाव है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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